जालंधर: पंजाब के जालंधर जिले का नाम इस बार कनाडा की एक सनसनीखेज जांच में सामने आया है। जालंधर के दोसांझ कलां गांव से जुड़ी बताई जा रही एक महिला जेल अधिकारी पर कनाडा की जांच एजेंसियों ने ऐसे गंभीर आरोप लगाए हैं, जिन्होंने वहां की जेल व्यवस्था की सुरक्षा और ईमानदारी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि हाई-सिक्योरिटी जेल में तैनात इस अधिकारी ने एक पंजाबी कैदी के साथ अपने निजी संबंधों का इस्तेमाल करते हुए जेल के भीतर संवेदनशील जानकारियां साझा कीं और एक वरिष्ठ अधिकारी पर कथित हमले की साजिश में ‘अंदरूनी मददगार’ की भूमिका निभाई।
मामले का खुलासा तब हुआ जब कनाडा की ऑन्टारियो सुपीरियर कोर्ट की अनुमति के बाद 563 पन्नों के इन्फॉर्मेशन टू ऑब्टेन (ITO) के कुछ हिस्से सार्वजनिक किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि जालंधर मूल की निशवंत कौर दोसांझ और पंजाब से कनाडा गए ट्रक ड्राइवर गुरप्रीत सिंह के बीच संबंध जेल में बंद होने से पहले से थे। गुरप्रीत के टोरंटो साउथ डिटेंशन सेंटर पहुंचने के बाद दोनों के संपर्क फिर सक्रिय हो गए।
जांच के मुताबिक महिला अधिकारी ने कथित तौर पर अपनी ड्यूटी उसी टावर और ब्लॉक में लगवाई, जहां गुरप्रीत बंद था। आरोप है कि वह अक्सर उसकी सेल के आसपास जरूरत से ज्यादा समय बिताती थीं और जेल के आधिकारिक फोन सिस्टम के अलावा गुरप्रीत के पास मौजूद कथित अवैध मोबाइल फोन के जरिए भी लगातार संपर्क में रहती थीं।
जांच दस्तावेजों में दावा किया गया है कि गुरप्रीत ने महिला अधिकारी को महंगे उपहार दिए, कॉस्मेटिक सर्जरी का खर्च उठाया और विदेश यात्राओं के लिए भी आर्थिक मदद की। जांच अधिकारियों का कहना है कि एक कैदी का जेल अधिकारी पर इस तरह का प्रभाव बेहद असामान्य और चिंताजनक माना गया।
मामले ने और गंभीर मोड़ तब लिया जब जून 2025 में एक वरिष्ठ करेक्शनल अधिकारी के घर पर कथित हमले की साजिश की जांच शुरू हुई। पुलिस का आरोप है कि महिला अधिकारी ने वरिष्ठ अधिकारी की कार की नंबर प्लेट की तस्वीर गुरप्रीत तक पहुंचाई। इसी जानकारी के आधार पर वाहन का रिकॉर्ड निकालकर अधिकारी के घर की पहचान की गई और कथित साजिश को आगे बढ़ाया गया। जांच एजेंसियों ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रोजेक्ट साउथ जांच का अहम हिस्सा बताया है।
पुलिस ने गुरप्रीत सिंह का नाम अमेरिका के वांछित ड्रग तस्कर रायन वेडिंग के कथित ड्रग नेटवर्क से भी जोड़ा है। गुरप्रीत अक्टूबर 2024 से टोरंटो की जेल में बंद है और अमेरिका प्रत्यर्पण की प्रक्रिया का सामना कर रहा है।
फिलहाल निशवंत कौर फरवरी से पेड लीव पर हैं। उनके वकील ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि उनकी मुवक्किल ने जांच में पूरा सहयोग किया, अपना फोन जांच के लिए उपलब्ध कराया और उन्होंने कोई आपराधिक या पेशेवर कदाचार नहीं किया। दूसरी ओर गुरप्रीत सिंह के वकील का कहना है कि घटना के कई महीने बाद भी उनके मुवक्किल पर कोई औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं।
मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और जांच जारी है। इसलिए आरोपों की अंतिम सत्यता का फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा।

