पंजाब की राजनीति और सिख संस्थाओं से जुड़े गलियारों में उस समय हलचल मच गई, जब शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल तथा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) से जुड़े पीए सतिंदर कोहली की गिरफ्तारी की खबर सामने आई। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक गंभीर मामले में जांच एजेंसियों द्वारा की गई है, जिसे लेकर पूरे प्रदेश में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कोहली को गिरफ्तार पंचकूला से किया गया है। वह एक करोड़ रुपये सालाना एसजीपीसी से लेते थे और सुखबीर बादल की कंपनियों के सीए भी थे।
सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियां लंबे समय से सतिंदर कोहली की भूमिका की पड़ताल कर रही थीं। प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए, जिनके आधार पर उन्हें हिरासत में लिया गया। हालांकि, गिरफ्तारी के कारणों को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
एसजीपीसी और अकाली दल में बढ़ी बेचैनी
सतिंदर कोहली की गिरफ्तारी के बाद एसजीपीसी और अकाली दल के भीतर बेचैनी साफ देखी जा रही है। पार्टी और संस्था से जुड़े कई नेताओं ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है, जबकि विरोधी दल इसे “कानून अपना काम कर रहा है” बताते हुए जांच का समर्थन कर रहे हैं।
सुखबीर बादल का नाम जुड़ने से मामला और संवेदनशील
इस पूरे घटनाक्रम में सुखबीर सिंह बादल का नाम सामने आने से मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। सिख पंथक राजनीति में सुखबीर बादल एक बड़ा चेहरा माने जाते हैं, ऐसे में उनके पीए से जुड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी ने सियासी समीकरणों को हिला दिया है।
विपक्ष का हमला, सरकार से जवाब की मांग
विपक्षी दलों ने सरकार से सवाल किया है कि क्या यह कार्रवाई निष्पक्ष है या फिर राजनीतिक दबाव में की गई है। वहीं सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है और जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही हैं।
आने वाले दिनों में बढ़ सकता है सियासी घमासान
जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में पंजाब की राजनीति में बड़ा तूफान ला सकता है। यदि जांच में और नाम सामने आते हैं, तो अकाली दल और एसजीपीसी दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
फिलहाल पूरे मामले पर सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं।

