पंजाब की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए पूर्व उद्योग मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा के घर और उनसे जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और औद्योगिक प्लॉट ट्रांसफर से जुड़े मामलों की जांच के तहत की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की टीम ने जालंधर और आसपास के अन्य स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया और महत्वपूर्ण दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड तथा संपत्ति से जुड़े कागजात खंगाले। एजेंसी को संदेह है कि औद्योगिक प्लॉट के कथित गलत ट्रांसफर और वित्तीय लेनदेन में अनियमितता और अवैध लाभ से जुड़े सबूत मिल सकते हैं।
इससे पहले भी सुंदर शाम अरोड़ा का नाम मोहाली औद्योगिक प्लॉट ट्रांसफर केस में सामने आ चुका है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि सरकारी जमीन के कथित गलत आवंटन से राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ। हालांकि, इस केस में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने विजिलेंस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे और एजेंसी की कार्यशैली को लेकर कड़ी टिप्पणियां की थीं।
ईडी की मौजूदा कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है, जो राज्य स्तर की जांच से अलग और स्वतंत्र मानी जाती है। एजेंसी अब अरोड़ा से जुड़े बैंक ट्रांजैक्शन, संपत्ति विवरण, कारोबारी नेटवर्क और फंड मूवमेंट की गहन जांच कर रही है।
इस छापेमारी के राजनीतिक मायने भी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि सुंदर शाम अरोड़ा ने हाल ही में भाजपा छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। कांग्रेस ने ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले और दबाव की राजनीति करार दिया है, जबकि भाजपा और केंद्र समर्थक इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम बता रहे हैं।

