चंडीगढ़। पंजाब की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी कैबिनेट में अहम फेरबदल किया। इस फेरबदल में सत्ता के सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले लोकल बॉडी विभाग की कमान बदल दी गई, जिससे साफ हो गया है कि सरकार शहरी प्रशासन और विकास कार्यों को लेकर नए सिरे से सख्ती और गति चाहती है।
कैबिनेट फेरबदल के तहत अब तक लोकल बॉडी विभाग संभाल रहे डॉ. रवजोत से यह अहम विभाग वापस ले लिया गया है और उन्हें NRI विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं दूसरी ओर, उद्योगपति से नेता बने संजिव अरोड़ा को लोकल बॉडी विभाग देकर उन्हें सरकार का सबसे ताकतवर मंत्री माना जा रहा है।
लोकल बॉडी विभाग क्यों है सबसे पावरफुल?
लोकल बॉडी विभाग के अंतर्गत नगर निगम, नगर काउंसिल, नगर पंचायत, प्रॉपर्टी टैक्स, अवैध निर्माण, सीवरेज, पानी की सप्लाई, शहरों का विकास और करोड़ों रुपये के ठेके आते हैं। यही वजह है कि इस विभाग को हमेशा राजनीतिक रूप से सबसे प्रभावशाली माना जाता रहा है।
अब यह विभाग संजीव अरोड़ा के हाथ में आने से प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों हलकों में हलचल तेज हो गई है।
डॉ. रवजोत को NRI विभाग
डॉ. रवजोत को अब NRI मामलों का जिम्मा सौंपा गया है। पंजाब में बड़ी संख्या में प्रवासी पंजाबी रहते हैं और NRI विभाग निवेश, जमीन विवाद, प्रशासनिक शिकायतों और विदेशों में बसे पंजाबियों से जुड़े मामलों में अहम भूमिका निभाता है। माना जा रहा है कि सरकार NRI निवेश को आकर्षित करने के लिए इस विभाग को सक्रिय करना चाहती है।
संजिव अरोड़ा का बढ़ता कद
लोकल बॉडी विभाग मिलने के बाद संजीव अरोड़ा का कद सरकार में काफी बढ़ गया है। शहरी क्षेत्रों में उनका सीधा दखल होगा और आने वाले समय में नगर निगम चुनावों तथा शहरी वोट बैंक पर इसका असर साफ दिख सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह फेरबदल सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि 2027 की रणनीति का भी हिस्सा है।
राजनीतिक संकेत साफ
कैबिनेट फेरबदल से यह संदेश भी गया है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान अब ऐसे चेहरों को आगे ला रहे हैं, जिन पर उन्हें पूरा भरोसा है। साथ ही यह भी साफ है कि शहरी विकास, नगर निगमों की कार्यप्रणाली और NRI निवेश सरकार की प्राथमिकता में ऊपर आ गए हैं।

