नरेश भारद्वाज
जालंधर।
शिअद नेता कंचनप्रीत कौर रंधावा के मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर तरनतारन स्थित जेएमआईसी पंकज वर्मा की अदालत में सुनवाई देर रात शुरू हुई और सुबह तक बहस चलती रही।आखिरकार अदालत ने कंचनप्रीत कौर को रिहा कर दिया।सरकार की ओर से डिप्टी एडवोकेट जनरल और बचाव पक्ष की ओर से एडवोकेट डीएस सोबती पेश हुए हैं। कंचनप्रीत कौर अदालत में मौजूद थी
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कंचनप्रीत कौर की रिहाई अकाली दल के लिए ऑक्सीजन देने वाली है और पंजाब सरकार के लिए झटका।
हाईकोर्ट ने कहा था कि जब कोई व्यक्ति स्वयं जांच में शामिल हो रहा हो, तो उसे अचानक गिरफ्तार कैसे किया जा सकता है? अदालत ने इस कार्रवाई को पारदर्शिता के खिलाफ बताया और तुरंत कंचनप्रीत की कस्टडी पुलिस से लेकर जज को सौंप दी। साथ ही आदेश दिया गया कि जब तक उनके वकील अदालत में नहीं पहुंचते, तब तक उन्हें रिमांड के लिए पेश न किया जाए।
इसके बाद पुलिस कंचनप्रीत को तरनतारन कोर्ट लेकर पहुंची। हाईकोर्ट के निर्देश साफ थे—उनके वकील अर्शदीप कलेर और दमनप्रीत सोबती के पहुंचने से पहले कोई कार्यवाही शुरू नहीं होगी।
तरनतारन कोर्ट में रात 8 बजे सुनवाई की शुरुआत हुई और दोनों पक्षों के बीच कानूनी बहस का दौर शुरू हो गया। रात 10 बजे बहस और तेज हो गई, जिसमें बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी को गैरकानूनी बताया, जबकि पुलिस ने अपने कदम को सही ठहराने का प्रयास किया।
रात भर चलती सुनवाई के बीच समर्थक अदालत के बाहर इंतजार में खड़े रहे। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर लाइव अपडेट्स शेयर किए, और इस केस ने राजनीतिक हलचल भी तेज कर दी।
आखिरकार, लंबी कानूनी बहस के बाद, सुबह 4 बजे अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया—कंचनप्रीत कौर को रिहा करने का आदेश दिया गया।

