चंडीगढ़, 10 मार्च 2026
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के प्रस्ताव को लेकर पूर्व शिक्षा मंत्री और विधायक परगट सिंह ने पंजाब विधानसभा में आज फिर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह व्यापार समझौता नहीं बल्कि प्रधानमंत्री का अमेरिका के सामने सरेंडर है। इस तरह के समझौते बराबर वाले देशों के बीच होते हैं। इस मुद्दे को लेकर हमारे देश का चौथा पिल्लर भी चुपी साधे बैठा है। उन्होंने विधानसभा में आम आदमी पार्टी सरकार के विधायकों को आगे आकर साथ मिलकर लड़ने की अपील की, ताकि खेती पर निर्भर पंजाब और पड़ोसी राज्यों के छोटे किसानों, मजदूरों और छोटे व्यापारियों को बचाया जा सके।
26 फरवरी को हाउस में प्रस्ताव देने वाले विधायक परगट सिंह ने समझौते को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि जब किसी राजा के चरित्र में कमजोरी आ जाए तो यह पूरे देश की कमजोरी बन जाती है। यह समझौता हमारे देश के किसानी की नींव पर सीधा हमला है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका और भारत में खेती संबंधी व्यापार की कोई तुलना नहीं है। अमेरिका अपने किसानों को 1.5 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी देता है। जबकि हमारे किसानों को 6 हजार रुपए प्रति परिवार सब्सिडी मिलती है। भारत और अमेरिका की खेती में बहुत बड़ा अंतर है। यह समझौता नहीं सिरेंडर है। क्योंकि आयात ड्यूटी जीरो करने से भारतीय बाजार टिक नहीं पाएगा। जी-20 सबमिट में भी यह कहा गया था कि छोटे देशों और विकासशील देशों के बाजार में बड़े देश इंटर नहीं करेंगे।
कपास पर भी 11 फीसदी ड्यूटी घटाने की बात पर भी परगट ने उठाई। कहा कि अगर कपास पर ड्यूटी घटी को हमारा और उनका कोई मुकाबला नहीं रहेगा। उनकी कपास की बाढ़ आ जाएगी। खेती पर निर्भर पंजाब और हिमाचल प्रदेश समेत अन्य पड़ोसी राज्य पर बड़ा गहरा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का व्यापार हर साल 500 अरब डालर है, जबकि हमारा व्यापार 40-42 अरब डालर का है। अगर हम हर साल 100 अरब डालर का व्यापार करते हैं तो हमारे पैसे की स्थिति कमजोर हो जाएगी। हम टिक नहीं रह सकेंगे और हमारा व्यापार घाटा बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा। जिसकी तुलना हम नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि जब टैरिफ घटाएगा तो हमारे एमएसपी पर दबाव बड़ेगा। सरकारों ने हमें इतनी एमएसपी नहीं दी है और आयात ज्यादा होने पर हम सरेंडर कर देंगे।
परगट सिंह ने अंत में पंजाब सरकार और आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों से इस मुद्दे पर आगे आकर बात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसी तरह केंद्र सरकार पर दबाव बनेगा। हमें यह बताना होगा कि हम सभी पंजाब के छोटे किसानों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों के साथ खड़े हैं और उनको बचा सकेंगे।

