आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर एक बार फिर असहज स्थिति के संकेत सामने आए हैं। पार्टी विधायक रणवीर भुल्लर की पत्नी अमनदीप गोसल द्वारा पत्रकारों पर दर्ज मामलों को रद्द करने की मांग ने न केवल सियासी गलियारों में चर्चा तेज कर दी है, बल्कि इसे पार्टी लाइन के खिलाफ खड़ा रुख भी माना जा रहा है।
अमनदीप गोसल ने खुले तौर पर यह कहा कि पत्रकारों पर दर्ज केस रद्द होने चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना जरूरी है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब आम आदमी पार्टी की सरकार पर विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि वह आलोचनात्मक पत्रकारिता को दबाने की कोशिश कर रही है।
पार्टी लाइन से अलग सुर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमनदीप गोसल का बयान सीधे तौर पर आप सरकार के रुख से टकराता हुआ दिखाई देता है। अब तक पार्टी नेतृत्व पत्रकारों पर दर्ज मामलों को लेकर कोई नरम रुख अपनाता नहीं दिखा था। ऐसे में एक विधायक के परिवार से जुड़े व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक मंच पर सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना, पार्टी के भीतर असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
क्या इसे बगावत कहा जाए?
हालांकि औपचारिक रूप से इसे “बगावत” कहना जल्दबाज़ी हो सकती है, लेकिन सियासी तौर पर यह बयान अंदरूनी विरोध की श्रेणी में जरूर आता है। आम तौर पर सत्ताधारी दल अपने विधायकों और उनसे जुड़े चेहरों से यह अपेक्षा करता है कि वे पार्टी की आधिकारिक लाइन का समर्थन करें या कम से कम सार्वजनिक रूप से विरोध न करें।

